मि. सहाय (उम्र 75 साल) एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर. अपनी सारी संपत्ती बेटे की पढाई में लगाने के बाद, अपने बेटे की मौत के कारण वह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य रह गए..भीख मागने की बजाय उन्होंने पपेट बेचना चुना...
अब वह प्रतिदिन रोहतक से दिल्ली पपेट बेचने आते है. इनके हौसले को सलाम!

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